Thursday, December 1, 2022
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कोटवार व केंद्र प्रभारी को हटाने दो गांव के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

ग्रामीणों का आरोप छोटी बात को लेकर कोटवार कर रहा विवाद, फड़ प्रभारी पर अभ्रद व्यवहार और टोकन नहीं काटने का आरोप


महासमुंद। जिले के ग्राम चौकबेड़ा के ग्रामीण जहां प्रशासन की ओर से नियुक्त किए गए अस्थाई कोटवार के व्यवहार से तो वहीं ग्राम धामनघुटकुरी के ग्रामीण खरीदी केन्द्र प्रभारी के व्यवहार से त्रस्त हैं। दोनों ही गांव के ग्रामीण कोटवार और केन्द्र प्रभारी को हटाने लामबंद हो गए हैं। मंगलवार को ग्रामीणों ने मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर से करते हुए हटाने की मांग की है।
ग्राम पंचायत चौकबेड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अस्थाई कोटवार के रुप में पदस्थ मेघराज जगत गांव में छोटी-छोटी बात को लेकर विवाद करता है और थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज कराता है। जिससे ग्रामीण परेशान हैं। पूर्व में पदस्थ उनका भाई रवि जगत को लेकर कोर्ट में केस चल रहा था। दोनों के आपसी समझौता कर उसे यहां पदस्थ किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों भाई मिलकर ग्रामवासियों को लड़ा रहा है जिससे ग्रामीण परेशान हंै। ग्रामीणों ने प्रशासन से उक्त कोटवार को गांव से हटाने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं में थानूराम यादव, तिलेश्वर, गोवराखन, खिलेश्वर, रमेशर, सालिकराम, संतू, अमित ठाकुर, भानोबाई, गुमन और खेमलाल महेन्द्र आदि शामिल हैं।
*फड़ प्रभारी पर अभ्रद व्यवहार व धान नहीं खरीदने का आरोप*
फड़ प्रभारी द्वारा अभ्रद व्यवहार किया जाता है। खरीदी शुरु होने के बाद भी टोकन नहीं काटा जा रहा है और मारपीट की धमकी दी जाती है। ये आरोप धामनघुटकुरी खरीदी केन्द्र के प्रभारी पर ग्रामीणों ने लगाया है। जनचौपाल में फड़ प्रभारी की शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीणों में डोलामणी साहू ने बताया कि बीते 1 नवंबर से धान खरीदी शुरु हो गई है। पर फड़ प्रभारी द्वारा अभी तक किसानों को धान बेचने के लिए टोकन जारी नहीं किया गया है जिससे किसान परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फड़ प्रभारी शराब के नशे में खरीदी केन्द्र को विवादित जमीन में होना कहकर टोकन काटने से मना कर रहा है। प्रभारी पांच-पांच किलो धान और रुपए की मांग करता है और नहीं देने पर धान नहीं खरीदने की धमकी देता है। ग्रामीणों ने उक्त केन्द्र प्रभारी को हटाने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा है कि मांग पूर्ण न होने की स्थिति में उनके द्वारा धान नहीं बेचा जाएगा और वे केन्द्र परिसर में ही आमरण अनशन करने मजबूर हो जाएंगे।    

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