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सांप दिखाकर परिवार का पालन पोषण करता है सांवरा समाज

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सांप को मानते हैं परिवार का सदस्य


महासमुुंद। आज नागपंचमी है। एक ओर जहां आज घरों, मंदिरों और विद्यालयों में सांपों का छायाचित्र बनाकर उनकी पूजा-अर्चना की जा रही है वहीं दूसरी ओर कुछ परिवार ऐसे हैं जो लोगों को सांप दिखाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।
जिले में निवासरत सांवरा जनजाति के लोग जहरीले सांपों को पकड़ लोगों को इसका खेल दिखाकर जीवन यापन करते हंै। सांपों का खेल दिखाने और घरों में निकलने वाले सांपों को पकडऩे के लिए लोगों द्वारा भेंट स्वरुप दी जाने वाली राशि और राशन के भरोसे इनका परिवार जीवन यापन कर रहा है। आज नागपंचमी पर सांवरा जनजाति के बच्चे और महिला-पुरुष शहर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को सांप का खेल दिखाते हुए नजर आए। लोगों ने इस अवसर पर सांपों की टोकरी में भेंट स्वरुप रुपए और अन्य चीजें चढ़ाकर सांपों को प्रणाम कर पूजा की। शहर में संावरा जाति के बच्चे गली-मोहल्लों में लोगों को सांप दिखाते हुए नजर आए।  
तुमगांव में वर्षों से निवासरत है सांवरा परिवार
तुमगांव के भाठापारा में सांवरा जनजाति का 15-20 परिवार वर्षों से निवासरत है, जो जहरीले सांपों को पकडऩे और इसका शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में खेल दिखाने का कार्य वर्षों से करते आ रहे हैं। इनके पास लगभग हर प्रजाति के सांप है। सांप इनके लिए सिर्फ आय का साधन हीं नहीं है बल्कि इनके विवाह में संाप की अहम भूमिका है। क्योंकि इसके बिना इनका विवाह संभव नहीं है। इसलिए ये सांप को अपना परिवार का सदस्य मानते हैं और इसका परिवार के सदस्य की तरह देखभाल करते हैं।
अब तक नहीं बदला आय का जरिया
हम 21 वीं सदी में पहुंच चुके हंै। इसके साथ कई लोगों ने अपने पांरम्परिक व्यवसाय को पीछे छोड़ दूसरा व्यवसाय चुन लिया है। पर सांवरा एक ऐसा समाज है जो आज भी अपने पारंपरिक कार्य के भरोसे टिका है। सांप पकडऩे और खेल दिखाने का कार्य वर्षों से इनकी पीढ़ी में चल रही है जिसे इनके बच्चे भी अपनाते जा रहे हैं। इनके परिवारिक माहौल में कोई खास बदलाव नहीं आया है। खासकर इनका रहन-सहन पहले जैसा ही है।

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