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बारिश से उखडऩे लगी एनएच 353 से डामर की परतें

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निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
महासमुंद। डामरीकरण के बाद पहली ही बारिश में राजिम मोड़ से नदीमोड़ तक डामर की परतें उखड़ चुकी है जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इधर, सड़क से डामर उखडऩे से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हंै। नागरिकों और निर्माण के जानकारों का कहना है कि निर्माण हुए पूरे दो साल भी नहीं हुआ है ्रडामरीकरण की परतें उखडऩे लगी है। कुछ जगहों पर गड्ढे हो गए हैं जो राहगीरों के लिए हादसे की वजह बनते जा रहे हंै। ज्ञात हो कि चौड़ीकरण-डिवाइडर निर्माण के साथ हुए नाली व पिव्हर ब्लॉक के निर्माण से पहले ही निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। अब सड़क की भी हालत खराब होती जा रही है। बारिश के बाद संभवत: राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग सड़क की मरम्मत पर देगा।  
यह फिर हिचकोले खा रहे राहगीर
बेलसोंडा रेलवे क्रासिंग में चलने वाले राहगीर एक बार से हिचकोले खाने मजबूर हंै। करीब दो माह पूर्व यहां राहगीरों की समस्या को देखते हुए फाटक के पास दोनों ओर करीब 30-40 मीटर तक सड़क पर डामरीकरण कराया गया था जो मानसून की हुई बारिश से उखड़ गई और गड्ढे हो गए हैं। बारिश में भारी वाहनों की आवाजाही से गड्ढे बढ़ते जा रहे हैं। जिससे बाइक, कार सवार फिर से हिचकोले खा रहे हैं। वाहन सवारों को जितनी परेशानी दिन में नहीं होती उससे अधिक रात में होती है।
शहर में बीच से दब रही सड़क, दरारें भी
खैरा-खरोरा जिला अस्पताल तक सड़क की हालत भी निर्माण के कुछ ही वर्षो में खराब होती दिखाई दे रही है। खरोरा से शहर की ओर सड़क मध्य में कई जगहों से दब गई है और इसमें दरार भी पड़ चुकी है। इधर, जिन जगहों पर पाइप लाइन सुधार और किसी अन्य कारणों से सड़क पर खोदे गए गड्ढों पर अब तक डामरीकरण नहीं किया गया है जिससे भी राहगीरों को परेशानी हो रही है। खरोरा और सितली नाला पुल के पास डामर की परत उखड़कर बह गई और पुरानी सड़क दिखाई दे रही है। 

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