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पंचायतों को स्वच्छ और सुंदर बनाने पर चर्चा

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महासमुंद। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर बैठक हुई। जिले की पंचायतों को स्वच्छ और सुंदर बनाने पर चर्चा हुई। कलेक्टर निलेशकुमार क्षीरसागर ने कहा कि ग्रामीण इलाकों को स्वच्छ बनाकर जीवन शैली को स्वच्छ वातावरण में जीने के लिए ढाल सकेंगे। उन्होंने ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत बुनियादी ढांचे जैसे खाद के गड्ढे, सोखने वाले गड्ढे, तालाब, शोधन संयंत्र आदि का भी निर्माण पंचायतों में कराने कहा। ऐसे निर्माण कार्यों से मल, जलजमाव से मुक्ति मिलेगी। मक्खी और मच्छर का प्रकोप भी कम होगा। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) गांव को स्वच्छ और साफ बनाए रखने का कार्य पूरी प्राथमिकता के साथ किया जाए।
कलेक्टर क्षीरसागर ने कहा कि प्लास्टिक पर्यावरण को पूरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है। प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को रोकना बहुत बड़ी समस्या है। सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने के लिए ग्रामीण लोगों को भी जागरूक करें। सिंगल यूज प्लास्टिक के जगह कपड़े से बने थैलें एवं कागज के बने कैरी बैग ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने लोगों को जागरूक करें।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एस आलोक ने ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में हुए बताया कि वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 के प्रथम चरण में 109 कार्य स्वीकृत किए गए थे। जिनमें से 106 कार्य पूर्ण एवं 3 प्रगतिरत है। उन्होंने बताया कि इसी तरह द्वितीय चरण में 130 कार्य स्वीकृत किए गए जिनमें से 34 कार्य पूर्ण हो चुके है, शेष प्रगतिरत है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी विकासखण्डों के 258 ग्राम पंचायतों में 3742 हितग्राहियों के लिए घरेलू शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें से 1402 शौचालय पूर्ण हो चुके हैं, शेष प्रगतिरत है। इसी प्रकार सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए जिले के सभी विकासखण्डों में 215 पूर्ण हो चुके हैं, कुछ प्रगतिरत हैं। उन्होंने बताया कि जिले के सभी ग्रामों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया जा रहा है।

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