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जिले में रोका-छेका अभियान कागजों में, सड़क पर मवेशियां का कब्जा

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शहर में गोठान के बाद भी सड़कों पर घूम रहे मवेशी

महासमुंद। प्रदेश में एक जुलाई से रोका-छेका अभियान की शुरुआत हो चुकी है लेकिन इसका असर यहां जिला मुख्यालय में बिलकुल भी देखने को नहीं मिल रहा है। शहर के मुख्य मार्ग और अन्य मार्गों में सड़क के बीचों-बीच बैठे मवेशियों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि रोका-छेका अभियान कागजों में चल रहा है।

बारिश के बाद खेती-किसानी के कार्यों में तेजी के बाद शहर की सड़कों पर मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शहर से होकर गुजरे एनएच 353 के अलावा अन्य मार्गों में मवेेशियां राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। जिससे हादसे की संभावना बढ़ती जा रही है। राहगीर दिन में तो जैसे-तैसे हादसे का शिकार होने से बच जा रहे हैं लेकिन रात में हादसे से शिकार हो रहेे हैं। इधर, मवेशियों को लेकर किसानों की फसल को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। परसकोल खार में खेती करने वाले किसान काफी चिंतित हैं।
सड़कों पर जगह-जगह मवेशियां
शहर का बीटीआई रोड को करीब 15 साल पहले गौरव पथ बनाया गया था लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते इस मार्ग से गौरव गायब ही हो गया और पिछले कुछ सालों से यह गौ पथ बनता जा रहा है। शास्त्री चौक से कलेक्टोरेट निवासी तक यहां सड़कों पर जगह-जगह मवेशी बैठे हुए दिखाई देते हैं। दिन की अपेक्षा रात में इनकी संख्या काफी अधिक रहती है जिससे मार्ग में चलना राहगीरों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
हाईवे में भी मवेशियों का जमावड़ा
मवेशी केवल शहर के मुख्य मार्ग में ही नहीं, हाईवे में भी दिखाई देते हैं। एनएच 53 में रात को मवेशी सड़क पर बैठकर राहगीरों के लिए परेशानी की वजह बने हुए हैं। ज्ञात हो कि एनएच में मवेशियों की वजह से कई बड़े हादसे हो चुके हंै जिसमें मवेशियों की मौत भी हो चुकी है।
वर्जन
शहर की सड़कों पर बैठे मवेशियों की धरपकड़ की कार्रवाई जल्द ही शुरु की जाएगी। इसके लिए टीम तैयार कर ली गई है।
-आशीष तिवारी, सीएमओ महासमुंद

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