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खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाने का दुर्भाग्यपूर्ण : रश्मि

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महासमुंद। कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में मोदी सरकार द्वारा खुदरा में मिलने वाले आटा, दाल, चावल, गुड़, गेहूं, बाजरा, ज्वार, दूध, दही, पनीर, छाछ इत्यादि खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाने का दुर्भाग्यपूर्ण फैसला किया है। आजादी के 75 वर्षों में पहली बार आवश्यक खाद्य पदार्थों पर टैक्स लगाया गया है। खाद्य वस्तुओं को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के पास महंगाई बढ़ाने के हर तर्क मौजूद है, लेकिन महंगाई कम करने के लिए एक भी उपाय केंद्र सरकार के पास नहीं है। चंद्राकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महंगाई के मुद्दे पर जनता के समक्ष जवाब देना ही पड़ेगा। अब से दूध, दही, मक्खन, चावल, दाल, ब्रेड जैसे पैक्ड उत्पादों पर जनता से 5 प्रतिशत जीएसटी वसूला जाएगा।
खाने-पीने की कई चीजों पर जीएसटी लागू
खाने-पीने की कई चीजों पर 18 जुलाई से जीएसटी लागू हो गया है। इनमें पहले से पैक और लेबल वाले अनब्रांडेड खाद्य पदार्थ जैसे दाल, चावल, आटा, गेहूं समेत सभी अनाज शामिल हैं। इन पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है। आज से पहले तक जीएसटी के दायरे से बाहर रहे इन सामानों की खरीद पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा। रिकार्डतोड़ बेरोजगारी के बीच लिया गया यह फैसला मध्यमवर्गीय परिवारों और विशेषकर किराए के मकानों में रहने वाले संघर्षरत युवाओं की जेबें और हल्की कर देगा।

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